अक्सर शुरुआत छोटी-छोटी बातों से होती है। पर्स से पैसे गायब होने लगते हैं। अलमारी के पीछे जली हुई सिल्वर फॉयल की पट्टी मिलती है। बेटा, भाई या पति दिन भर सोता रहता है, शाम को सब पर चिल्लाता है, और हर सवाल पर उसके पास नया बहाना होता है। दिल में कहीं आपको शक हो चुका है: घर में कोई चिट्टा ले रहा है।
अगर आप आज रात इसी हालत में यह पढ़ रहे हैं, तो इसे आराम से पढ़िए। कांगड़ा में चिट्टे से जूझने वाले आप पहले परिवार नहीं हैं, और अभी देर नहीं हुई है। हिमाचल के कई नौजवान चिट्टा छोड़कर अपनी ज़िंदगी दोबारा खड़ी कर चुके हैं, और ऐसी ज़्यादातर कहानियों में एक परिवार होता है जिसने हार नहीं मानी।
यह गाइड ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट (Eshan Charitable Trust) की टीम ने तैयार की है, जो कांगड़ा में एक रजिस्टर्ड नशा मुक्ति केंद्र चलाता है, और इसे एक मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट) ने जांचा है। इसमें वह सब है जो परिवार हमसे रोज़ पूछते हैं: चिट्टा क्या है, चिट्टे की पहचान कैसे करें, उससे बात कैसे करें, विदड्रॉल में क्या होता है, ओवरडोज़ में क्या करें, इलाज कैसे होता है, सही नशा मुक्ति केंद्र कैसे चुनें, और घर लौटने के बाद उसे दोबारा नशे से कैसे बचाएं। शराब, चरस, भांग और गोलियों के नशे की बात भी की गई है, क्योंकि बहुत से युवा एक से ज़्यादा नशा करते हैं।
- शांत रहें। चिल्लाना, मारना या कमरे में बंद करना चिट्टे की लत को और बिगाड़ता है।
- पैसे न दें। चिट्टे के लिए पैसे कभी न दें, और "उसे तकलीफ न हो" सोचकर खुद चिट्टा कभी न खरीदें।
- किसी जानकार से बात करें। डॉक्टर, काउंसलर या मुफ्त हेल्पलाइन 14446 और 14416 आपको अगला कदम बता सकते हैं।
- इलाज सोच-समझकर चुनें। ऐसा रजिस्टर्ड नशा मुक्ति केंद्र चुनें जहां मेडिकल डिटॉक्स और लंबा प्रोग्राम हो, न कि 15 दिन की "बंदी"।
- इमरजेंसी में पहले फोन करें। अगर वह जाग नहीं रहा, सांस धीमी है या आंख की पुतलियां बहुत छोटी हैं, तो तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें।
This guide is also available in English: Ghar Mein Koi Chitta Le Raha Hai? (English guide)
चिट्टा क्या है, और चिट्टे की लत इतनी तेज़ी से क्यों फैल रही है?
असल में चिट्टा क्या है
चिट्टा उत्तर भारत में हेरोइन का आम नाम है। पंजाबी में "चिट्टा" का मतलब होता है "सफेद", और पाउडर के रंग की वजह से इसे यह नाम मिला। हेरोइन एक ओपिओइड है, जो अफीम के पौधे से मिलने वाले मॉर्फिन से बनती है। कांगड़ा तक जो चिट्टा पहुंचता है, वह लगभग कभी शुद्ध नहीं होता। The Tribune के अनुसार चिट्टा सफेद या हल्के भूरे रंग का पाउडर है, जिसमें हेरोइन के साथ ज़हरीले केमिकल मिलाए जाते हैं, और इसे स्मैक या ब्राउन शुगर भी कहा जाता है। किसी को नहीं पता कि पुड़िया में क्या मिला है, इसलिए चिट्टे की हर खुराक एक जुआ है।
चिट्टे का नशा कैसे किया जाता है
ज़्यादातर युवा इसे पीकर शुरू करते हैं। पाउडर को सिल्वर फॉयल की पट्टी पर गर्म किया जाता है और धुआं मुड़े हुए नोट या खाली पेन की नली से खींचा जाता है। कुछ इसे नाक से सूंघते हैं। जब शरीर को आदत पड़ जाती है, तो कई लोग इंजेक्शन लेने लगते हैं, क्योंकि कम मात्रा में ज़्यादा असर होता है। इंजेक्शन अपने साथ नए खतरे लाता है: इन्फेक्शन, फोड़े, खराब नसें, और एक ही सुई बांटने से एचआईवी और हेपेटाइटिस सी।
चिट्टे की लत इतनी जल्दी क्यों लगती है
हेरोइन जैसे ओपिओइड दिमाग के उस हिस्से पर असर करते हैं जो खुशी और दर्द को संभालता है। पहली कुछ बार बहुत सुकून महसूस होता है, जैसे हर चिंता गायब हो गई हो। लेकिन दिमाग बहुत जल्दी इसका आदी हो जाता है। उतनी ही मात्रा से असर कम होने लगता है और ज़्यादा चाहिए होता है। डॉक्टर इसे सहनशीलता या टॉलरेंस कहते हैं। MSD मैनुअल (हिंदी) भी बताता है कि ओपिओइड लेने वालों का शरीर इन पर निर्भर हो जाता है, इसलिए अचानक छोड़ने पर विदड्रॉल के लक्षण आते हैं।
इसीलिए सिर्फ इच्छाशक्ति से यह लत कम ही छूटती है। जब तक परिवार को पता चलता है, तब तक वह अक्सर मज़े के लिए नहीं, बल्कि बीमार महसूस न करने के लिए चिट्टा ले रहा होता है। उसके दिमाग में क्या चल रहा है, यह समझने के लिए हमारा लेख नशे का मनोविज्ञान पढ़ें (अंग्रेज़ी में)।
कांगड़ा के परिवारों में यह ज़्यादा क्यों दिख रहा है
कांगड़ा पुलिस के अनुसार ज़िले में आने वाली ज़्यादातर हेरोइन पंजाब और जम्मू-कश्मीर से आती है। लेकिन यहां इसे बेचने वाले ज़्यादातर हमारे अपने ही लड़के हैं। साल 2024 में कांगड़ा पुलिस ने NDPS के 149 मामले दर्ज किए और 245 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 215 हिमाचल के ही रहने वाले थे। अधिकारियों ने यह भी बताया है कि नशा करने वाले कई युवा, अच्छे घरों के लड़के भी, अपनी रोज़ की खुराक के लिए खुद चिट्टा बेचने लगते हैं और नए, कम उम्र के लड़कों को इस जाल में खींच लेते हैं।
इसमें बेरोज़गारी, खालीपन, दोस्तों का दबाव, सोशल मीडिया पर नशे के वीडियो, और यह पुरानी सोच जोड़ दीजिए कि नशा "मर्दों वाली बात" है, तो समझ आता है कि चिट्टा कांगड़ा घाटी के उन गांवों तक कैसे पहुंच गया, जहां पहले ऐसे नशे की बात भी नहीं होती थी।
कांगड़ा और हिमाचल में चिट्टा: आंकड़े क्या कहते हैं
बहुत से परिवारों को लगता है कि यह सिर्फ उनके घर में हो रहा है। ऐसा नहीं है। पिछले दो सालों में पुलिस, सरकार और खबरों ने यह तस्वीर सामने रखी है।
जनवरी से नवंबर 2025 तक हिमाचल में दर्ज NDPS मामले, जो 2024 की इसी अवधि से करीब 28% ज़्यादा हैं। स्रोत: Outlook India
युवाओं की तीन साल में चिट्टे जैसे नशे के ओवरडोज़ से मौत हुई, जैसा विधानसभा में बताया गया। स्रोत: ETV Bharat
लोग 2024 में कांगड़ा ज़िले में NDPS के 149 मामलों में गिरफ्तार हुए, जिनमें 215 हिमाचल के थे। स्रोत: The Tribune
पंचायतें, जहां सर्वे में चिट्टे का असर सबसे ज़्यादा मिला। इन्हें रेड, येलो और ग्रीन श्रेणी में बांटा गया है। स्रोत: ETV Bharat
ओवरडोज़ के आंकड़े दोबारा पढ़ने लायक हैं। 2026 के बजट सत्र में मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार हिमाचल में 2023 में 8, 2024 में 31 और 2025 में 27 युवाओं की ओवरडोज़ से मौत हुई। इनमें से हर संख्या के पीछे एक मां-बाप हैं, जिन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह उनका बेटा होगा।
2026 में पालमपुर और कांगड़ा में क्या हुआ
- मई 2026गग्गल के पास अमृतसर से बैजनाथ जा रही HRTC बस में 13 साल का एक लड़का करीब 130 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार तस्कर अब बच्चों को कैरियर बना रहे हैं।
- मई 2026पालमपुर उपमंडल में पुलिस ने एक कार से चिट्टा बरामद किया, और गिरफ्तार तीन में से दो लोग पंजाब के थे।
- मई से जून 2026ऑपरेशन नया सवेरा के तहत CIA कांगड़ा और पालमपुर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय हेरोइन नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। 16 लोग गिरफ्तार हुए, 167.18 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ, करीब ₹80 लाख के लेन-देन का पता चला, और ज़िले भर में आठ सप्लाई पॉइंट मिले। हिंदी में खबर यहां पढ़ें।
- जुलाई 2026पालमपुर में दो महिलाओं को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया। महिलाओं को कूरियर और विक्रेता बनाने के मामले बढ़ रहे हैं।
- सितंबर 2026पुलिस ने बैजनाथ में एक घर में गद्दे के नीचे छिपाया चिट्टा और पुराने कांगड़ा रोड के पास चिट्टा पकड़ा, और कुछ दिन बाद शाहपुर में एक टैक्सी से 67.62 ग्राम चिट्टा बरामद किया।
इनमें से ज़्यादातर बरामदगी कुछ ग्राम की है। माता-पिता के लिए यही सबसे चिंता की बात है। इसका मतलब है कि चिट्टा छोटी-छोटी पुड़ियों में घरों, स्कूलों और बस अड्डों के पास, आम युवाओं को बेचा जा रहा है।
सरकार चिट्टे के खिलाफ क्या कर रही है
हिमाचल सरकार ने 15 नवंबर 2025 को प्रदेश भर में एंटी-चिट्टा अभियान शुरू किया। तब से 234 पंचायतों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, तस्करों की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई हो रही है, और तस्करों की पक्की जानकारी देने पर ₹5,000 से ₹10 लाख तक का इनाम घोषित किया गया है। दूसरे चरण में पुलिस ने एक ही दिन में प्रदेश भर में 573 जगहों पर तलाशी ली। सबसे अच्छी बात यह है कि अब माता-पिता खुद 112 पर फोन करके अपने बच्चों की चिट्टे की लत छुड़ाने के लिए मदद मांग रहे हैं।
इलाज की तरफ, सरकार टांडा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में पुनर्वास सुविधा बना रही है, और अस्पतालों में 108 "दिशा" काउंसलिंग केंद्र शुरू किए गए हैं। ये अच्छे कदम हैं। लेकिन The Tribune की एक पड़ताल में पाया गया कि कांगड़ा में सरकारी रिहैब बेड अभी भी बहुत कम हैं, इसलिए ज़्यादातर परिवार निजी केंद्रों में जाते हैं। इसीलिए सही नशा मुक्ति केंद्र चुनना बहुत ज़रूरी है, जिसके बारे में हमने नीचे विस्तार से बताया है।
चिट्टे की पहचान: घर में कोई चिट्टा ले रहा है, इसके संकेत
कोई एक संकेत यह साबित नहीं करता कि वह चिट्टा ले रहा है। थका हुआ, चिड़चिड़ा युवा बस पढ़ाई या काम के तनाव में भी हो सकता है। ज़रूरी है कि कई हफ्तों में बनता हुआ पैटर्न देखें। अगर नीचे के कई संकेत जाने-पहचाने लगें, तो शांति से लेकिन जल्दी कदम उठाइए।
शरीर पर दिखने वाले संकेत
- आंख की पुतलियां बहुत छोटी, मंद रोशनी में भी
- बात करते-करते ऊंघना, भारी पलकें, धीमी आवाज़
- बार-बार खुजलाना, बांहों या चेहरे पर खरोंच
- वज़न घटना, भूख न लगना और कब्ज़
- चिट्टा न मिलने पर नाक बहना, उबासी, पसीना और बदन दर्द
- सुई के निशान, और गर्मी में भी पूरी बाजू के कपड़े
व्यवहार में बदलाव
- कहां था और किसके साथ था, इस पर झूठ
- नए दोस्त जिनसे मिलवाता नहीं, फोन हमेशा उल्टा रखा हुआ
- बाथरूम में लंबे समय तक बंद रहना
- छोटे सवालों पर अचानक गुस्सा या रोना
- पढ़ाई, काम, क्रिकेट, जिम या पुराने दोस्तों को छोड़ देना
पैसे और घर से जुड़े संकेत
- पर्स और बटुए से पैसे गायब होना
- सोना, फोन, गैस सिलेंडर, बर्तन या औज़ार गायब होना
- हर बार नई कहानी के साथ रिश्तेदारों से उधार
- बार-बार अचानक छोटी रकम की "ज़रूरत"
घर में मिलने वाली चीज़ें
- काली जली लकीरों वाली सिल्वर फॉयल की पट्टियां
- मुड़े हुए नोट, खाली पेन की नली, लाइटर
- छोटी प्लास्टिक की पुड़िया या मुड़े कागज़ की पुड़िया
- सिरिंज, मुड़े चम्मच, भूरे दाग वाली रुई
बच्चों और किशोरों में ETV Bharat से बात करते हुए एक डॉक्टर ने अचानक चिड़चिड़ापन, स्कूल से भागना, दोस्तों की कंपनी बदलना और बार-बार पैसे मांगना भी अहम संकेत बताए हैं। अपने बच्चे की पॉकेट मनी और खर्च पर नज़र रखना यहीं से शुरू होता है।
हिमाचल में कई परिवार बेटे की चिट्टे की लत में गहने, जमा-पूंजी और ज़मीन के पेड़ तक गंवा चुके हैं। मंडी के एक इलाके से खबर आई कि कुछ युवाओं ने अपने ही माता-पिता को दवा बताकर चिट्टा दे दिया, ताकि सप्लाई चलती रहे। अगर घर से पैसे और कीमती सामान चुपचाप गायब हो रहा है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।
घर पर ड्रग टेस्ट के बारे में: केमिस्ट पर यूरिन टेस्ट किट मिलती हैं, लेकिन नेगेटिव रिज़ल्ट का मतलब यह नहीं कि वह चिट्टा नहीं ले रहा, और ज़बरदस्ती टेस्ट करने से भरोसा टूट सकता है। पूरी जांच के साथ डॉक्टर सही टेस्ट करवा सकते हैं, जो आमतौर पर बेहतर रास्ता है।
सिर्फ चिट्टा नहीं: शराब, चरस, भांग और गोलियों का नशा
चिट्टा लेने वाले कई युवा शराब भी पीते हैं या गोलियां भी लेते हैं, और बहुत से परिवार सिर्फ शराब के लिए नशा मुक्ति केंद्र आते हैं। हिमाचल के परिवार जिन दूसरे नशों से सबसे ज़्यादा जूझते हैं, उनकी छोटी जानकारी यहां है।
शराब
भारत में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला नशा शराब है। AIIMS के राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार 10 से 75 साल के 14.6% लोग शराब पीते हैं। सुबह-सुबह पीना, बोतलें छिपाना, पहला पैग मिलने तक हाथ कांपना, काम से छुट्टी और घर में झगड़े इसके संकेत हैं।
महीनों तक रोज़ ज़्यादा पीने के बाद अचानक छोड़ने से दौरे और डिलीरियम ट्रेमेंस हो सकते हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी है। इसलिए शराब छुड़ाने का इलाज हमेशा डॉक्टर की निगरानी में शुरू होना चाहिए। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा लेख शराब की लत से रिकवरी पढ़ें।
चरस और गांजा
हिमाचल में भांग के पौधे का पुराना इतिहास है, और बहुत लोग चरस को नुकसान रहित मानते हैं। लेकिन नियमित भारी सेवन से लाल आंखें, कमज़ोर याददाश्त, किसी काम में मन न लगना, और कुछ युवाओं में घबराहट, हर किसी पर शक या साइकोसिस तक हो सकता है।
चरस और गांजे का इलाज ज़्यादातर काउंसलिंग और थेरेपी से होता है, साथ में अगर कोई मानसिक समस्या हो तो उसका इलाज भी।
भांग
भांग भी कैनबिस ही है, जिसे आमतौर पर खाया या पिया जाता है। इसका असर धीरे-धीरे होता है, इसलिए लोग असर महसूस होने से पहले ही ज़्यादा ले लेते हैं और बुरी तरह नशे या घबराहट में आ जाते हैं।
रोज़ की भांग भी एक लत है, और इसका इलाज चरस जैसा ही है: काउंसलिंग, दिनचर्या और सहारा।
गोलियों का नशा
इसमें ट्रामाडोल जैसी दर्द की गोलियां, कोडीन वाले कफ सिरप, और अल्प्राज़ोलम जैसी नींद या घबराहट की गोलियां आती हैं। इन्हें अक्सर चिट्टे या शराब के साथ मिलाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चेतावनी देता है कि ओपिओइड के साथ शराब या नींद की दवाएं लेने से सांस रुकने का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ नींद की गोलियां लंबे समय तक ज़्यादा लेने के बाद अचानक छोड़ने से दौरे भी पड़ सकते हैं, इसलिए गोलियों का डिटॉक्स भी डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए।
मिला-जुला नशा: सबसे खतरनाक
रात को चिट्टा, शादी में शराब, सोने के लिए कुछ गोलियां: यह पैटर्न आम है, और ओवरडोज़ का सबसे बड़ा खतरा इसी में है। अगर वह एक से ज़्यादा नशा करता है, तो डॉक्टर को सब कुछ बताएं, क्योंकि इससे डिटॉक्स का तरीका बदल जाता है। हमारे कांगड़ा के नशा मुक्ति केंद्र में चिट्टा, हेरोइन, स्मैक, शराब, चरस, गांजा, भांग, अफीम, डोडा, भुक्की, ट्रामाडोल, कोडीन सिरप, अल्प्राज़ोलम और मिले-जुले नशे का इलाज होता है।
पहली बार से रिकवरी तक: चिट्टे की लत का पूरा सफर एक तस्वीर में
यह तस्वीर दिखाती है कि चिट्टे की लत आमतौर पर कैसे बढ़ती है, और वापसी का रास्ता कैसा होता है। हर इंसान अलग है, लेकिन ज़्यादातर परिवार इसमें कहीं न कहीं अपनी कहानी पहचान लेंगे। तस्वीर अंग्रेज़ी में है, नीचे हर चरण हिंदी में लिखा है। बड़ा देखने के लिए तस्वीर पर टैप करें।
- पहली बारअक्सर जिज्ञासा, दोस्तों के दबाव, "फिट" होने की चाह या तनाव से भागने के लिए शुरुआत होती है।
- नियमित सेवनकभी-कभार से आदत बन जाती है। उतने ही असर के लिए ज़्यादा चिट्टा चाहिए, और पैसों की दिक्कत शुरू होती है।
- लतचिट्टा कंट्रोल करने लगता है: तेज़ तलब, छोड़ने की नाकाम कोशिशें, और पूरी ज़िंदगी नशा जुटाने के आसपास घूमने लगती है।
- परिवार को पता चलता हैव्यवहार बदलता है, पैसे गायब होते हैं, सेहत गिरती है, भरोसा टूटता है। कई परिवार यहां उलझन और बेबसी महसूस करते हैं।
- फैसलापरिवार जानकारी जुटाता है, डॉक्टर या काउंसलर से बात करता है, और एक रजिस्टर्ड केंद्र चुनता है।
- रिहैब मेंचौबीसों घंटे मेडिकल देखभाल, काउंसलिंग, तय दिनचर्या, अच्छा खाना और व्यायाम वाली एक सुरक्षित जगह।
- डिटॉक्स और विदड्रॉलमुश्किल, लेकिन कुछ समय के लिए। सही मेडिकल देखभाल से लक्षण दिनों से हफ्तों में कम हो जाते हैं।
- रिकवरी और बदलावट्रिगर समझने के लिए थेरेपी, अच्छी आदतें, रिश्तों की मरम्मत, नए हुनर और लक्ष्य।
- दोबारा नशे से बचावअपने ट्रिगर जानना, सहारा देने वाले लोग, काउंसलिंग जारी रखना और जल्दी मदद मांगना। एक चूक हार नहीं है।
- लंबी सेहतमंद ज़िंदगीबेहतर दिनचर्या, बेहतर रिश्ते और उज्ज्वल भविष्य, एक-एक दिन करके।
घर में कोई चिट्टा ले रहा है: परिवार सबसे पहले क्या करे?
यह पता चलने के बाद कि घर में कोई चिट्टा ले रहा है, पहला हफ्ता वह समय है जब परिवार सबसे ज़्यादा गलतियां करते हैं, और लगभग हमेशा डर की वजह से। यहां एक शांत, कदम-दर-कदम योजना है, जो हम फोन करने वाले हर परिवार को बताते हैं।
- आज रात घबराहट में कुछ न करेंरात के एक बजे, जब वह नशे में या गुस्से में हो, सामना करने से बात शायद ही बनती है। खुद को सोचने के लिए एक दिन दें।
- चुपचाप तथ्य जुटाएंजो देखा और कब देखा, लिख लें: गायब पैसे, मिली चीज़ें, नींद, मूड और दोस्तों में बदलाव। भावनाओं के मुकाबले तथ्यों पर बहस करना मुश्किल होता है।
- पूरा परिवार एक राय पर आएमाता-पिता, पत्नी, भाई-बहन तय करें कि क्या कहेंगे और क्या नहीं करेंगे। अगर एक भी व्यक्ति चुपके से पैसे देता रहा, तो पूरी योजना बिगड़ जाएगी।
- नशे का खर्च बंद करेंनकद और गहने ताले में रखें। उसके फोन, फीस या बाइक की EMI का भुगतान सीधे करें, हाथ में पैसे न दें। खाना, बिस्तर और प्यार देते रहें। आप चिट्टे को काट रहे हैं, अपने बेटे को नहीं।
- किसी प्रोफेशनल से बात करेंमुफ्त टेली-मानस हेल्पलाइन 14416, राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446, या किसी मनोचिकित्सक से बात करें। आप किसी रजिस्टर्ड नशा मुक्ति केंद्र को सिर्फ सवाल पूछने के लिए भी फोन कर सकते हैं। अच्छा केंद्र आप पर कभी दबाव नहीं डालेगा।
- बात करने का सही समय चुनेंजब वह होश में और शांत हो, आमतौर पर सुबह, अकेले में, एक-दो ऐसे लोगों के साथ जिन पर वह भरोसा करता है। रिश्तेदारों के सामने नहीं, और झगड़े के बीच तो कभी नहीं।
- डॉक्टरी जांच करवाएंचिट्टे के साथ अक्सर इन्फेक्शन, वज़न घटना और लिवर की दिक्कतें आती हैं, और इंजेक्शन लेने पर एचआईवी व हेपेटाइटिस सी का खतरा होता है। कई युवाओं के लिए "रिहैब" शब्द से पहले डॉक्टर के पास जाना आसान पहला कदम होता है।
- मिलकर इलाज की योजना बनाएंडिटॉक्स और रिहैब तय करें, केंद्र देखने जाएं, उसका रजिस्ट्रेशन जांचें, और तारीख तय करें। जितना जल्दी, उतना बेहतर।
- अपना भी ध्यान रखेंमाता-पिता और पत्नियां भारी तनाव, अपराधबोध और डर झेलते हैं। फैमिली काउंसलिंग अच्छे इलाज का हिस्सा है, कोई अलग चीज़ नहीं।
क्या कहें, और क्या कहने से बचें
| ऐसा कहें | ऐसा कहने से बचें |
|---|---|
| "मैं तुमसे प्यार करता हूं, और मुझे तुम्हारी बहुत फिक्र है।" | "तुमने इस परिवार को बर्बाद कर दिया।" |
| "मंगलवार को तुम्हारे कमरे में फॉयल मिली, और मेरे पर्स से पैसे गायब हैं।" | "पूरा गांव जानता है कि तुम क्या हो।" |
| "इलाज में हम पूरी तरह तुम्हारे साथ हैं।" | "अगर तुम हमसे प्यार करते, तो छोड़ देते।" |
| "हमने एक डॉक्टर से बात की है। क्या तुम हमारे साथ उनसे मिलने चलोगे?" | "मां की कसम खाओ कि फिर कभी हाथ नहीं लगाओगे।" |
| "बात किसी को दोष देने की नहीं है। बात तुम्हें ठीक करने की है।" | ऐसी धमकियां जिन्हें आप पूरा नहीं करेंगे। |
The Tribune में छपे एक मामले में कांगड़ा की एक महिला करीब 7 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ी गई। उसने पुलिस को बताया कि उसने यह अपने नशे के आदी बेटे के लिए खरीदा था, क्योंकि वह उसे तड़पते नहीं देख सकती थी। उसकी ममता पूरी तरह समझ में आती है। लेकिन चिट्टा खरीदना लत को ज़िंदा रखता है, ओवरडोज़ का कारण बन सकता है, और NDPS एक्ट के तहत इसे रखना अपराध है। विदड्रॉल दर्दनाक होता है, और डॉक्टर उसे सहने लायक बना सकते हैं। इसके बजाय मेडिकल मदद के लिए फोन करें।
क्या पुलिस के पास जाएं?
नशा करने वाले का इलाज करवाना और नशा बेचने वाले की शिकायत करना, दो अलग बातें हैं। अगर आपको पता है कि आपके इलाके में कौन चिट्टा बेच रहा है, तो आप अपना नाम बताए बिना ड्रग फ्री हिमाचल ऐप, MANAS हेल्पलाइन 1933 या 112 पर जानकारी दे सकते हैं। पुलिस का कहना है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
जो चिट्टा ले रहा है, उसके लिए लक्ष्य इलाज है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि नशा बेचने वालों और नशे के शिकार युवाओं को एक नज़र से नहीं देखा जा सकता। NDPS एक्ट की धारा 64A के तहत, अगर कम मात्रा के सेवन से जुड़े मामले में फंसा व्यक्ति सरकार द्वारा चलाए जा रहे या मान्यता प्राप्त अस्पताल या संस्था में खुद नशा मुक्ति इलाज के लिए आगे आता है और इलाज पूरा करता है, तो उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाता। अगर उस पर पहले से पुलिस केस है, तो यह उस पर कैसे लागू होगा, इसके लिए किसी वकील से बात करें।
जब वह चिट्टे की लत का इलाज करवाने से मना करे
लगभग हर परिवार यही सुनता है: "मैं जब चाहूं छोड़ सकता हूं", "बस एक बार लिया था", "आप बेवजह परेशान हो रहे हो"। इनकार करने का मतलब यह नहीं कि वह बुरा इंसान है। यह लत का ही हिस्सा है, और यह डर और शर्म से आता है।
चिल्लाने से बेहतर क्या काम करता है
- उसके चरित्र की नहीं, उन खास बातों की बात करें जो आपने देखी हैं।
- "तुम झूठे हो" की जगह "मुझे चिंता है" या "मुझे रात को नींद नहीं आती" जैसे वाक्य बोलें।
- साफ विकल्प दें: परिवार के पूरे साथ के साथ इलाज, या परिवार उसे बचाना बंद करेगा। यानी न पैसे, न रिश्तेदारों के सामने बहाने, न उसके कर्ज़ चुकाना।
- किसी ऐसे व्यक्ति को साथ लें जिसकी वह इज़्ज़त करता है: मामा, बड़ा भाई, टीचर, कोच, या कोई जो खुद चिट्टे से बाहर आया हो।
- फैमिली मीटिंग के लिए किसी काउंसलर की मदद लें। अचानक घेरने से कहीं बेहतर है एक प्रोफेशनल की मौजूदगी में योजना बनाकर की गई शांत बातचीत।
- दरवाज़ा खुला रखें। अगर वह आज मना करे, तो कहें कि आप फिर पूछेंगे, और सच में पूछें।
पहले दिन उसका 100% तैयार होना ज़रूरी नहीं। बहुत से लोग अनमने मन से इलाज शुरू करते हैं और पहले कुछ हफ्तों में उनका हौसला बनता है, जब विदड्रॉल की धुंध छंटती है और वे ऐसे लोगों से बात करते हैं जो उसी रास्ते से गुज़र चुके हैं।
क्या किसी को ज़बरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र ले जाना कानूनी है?
परिवार अक्सर उन "पिकअप सर्विस" के बारे में पूछते हैं जो रात को आकर व्यक्ति को उठा ले जाती हैं। बहुत सावधान रहें। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 (Mental Healthcare Act) के तहत नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के भी कानूनी अधिकार हैं। भर्ती आमतौर पर अपनी मर्ज़ी से होती है। बिना सहमति भर्ती सिर्फ कुछ खास हालात में, योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जांच के बाद, और कानूनी सुरक्षा उपायों व समीक्षा के साथ ही हो सकती है।
किसी को बांधना, पीटना या घसीटकर घर से ले जाना इलाज नहीं है, और यह अपराध हो सकता है। अगर आपको लगता है कि वह खुद के लिए या दूसरों के लिए खतरा है, तो पहले किसी मनोचिकित्सक से पूछें कि आपके मामले में कानून क्या इजाज़त देता है।
चिट्टे के विदड्रॉल के लक्षण: दिन-ब-दिन क्या होता है
चिट्टे का विदड्रॉल ही वह वजह है जिससे सच में चिट्टा छोड़ना चाहने वाले बहुत से युवा एक दिन के अंदर वापस लौट जाते हैं। क्या होने वाला है, यह जानने से परिवार शांत रह पाता है, और उसे भी समझ आता है कि यह दौर गुज़र जाएगा।
| आखिरी बार चिट्टा लेने के बाद | क्या महसूस हो सकता है |
|---|---|
| 6 से 12 घंटे | बेचैनी, घबराहट, उबासी, नाक बहना, आंखों से पानी, पसीना और तेज़ तलब। MedlinePlus के अनुसार हेरोइन के आखिरी सेवन के 12 घंटे के अंदर लक्षण शुरू हो जाते हैं। |
| पहले से तीसरे दिन तक, सबसे मुश्किल दिन | मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द, पेट में मरोड़, दस्त, उल्टी, रोंगटे खड़े होना, पुतलियां फैलना, नींद न आना, गुस्सा, और "बस आखिरी एक बार" की ज़िद। |
| चौथे से सातवें दिन तक | शारीरिक लक्षण धीरे-धीरे कम होते हैं। कमज़ोरी, कम नींद और उदासी बनी रहती है। |
| हफ्तों से महीनों तक | तलब, उदासी, कम नींद, चिड़चिड़ापन और किसी चीज़ में मज़ा न आना। दोबारा नशे का खतरा इसी दौर में सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए डिटॉक्स के बाद भी रिहैब चलता रहता है। |
समय इस पर निर्भर करता है कि उसने कितना और कब से चिट्टा लिया, और क्या साथ में शराब या गोलियां भी लीं।
क्या चिट्टे का विदड्रॉल खतरनाक है?
MedlinePlus के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क के लिए ओपिओइड का विदड्रॉल बहुत दर्दनाक होता है, लेकिन आमतौर पर जानलेवा नहीं होता। असली खतरे इसके आसपास हैं:
- पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) उल्टी और दस्त से, खासकर उस शरीर में जो चिट्टे से पहले ही कमज़ोर हो चुका है।
- उदासी और बुरे ख्याल पहले कुछ दिनों में, जब सब कुछ बेकार लगता है।
- मिला-जुला विदड्रॉल। अगर वह भारी शराब भी पीता है या नींद की गोलियां लेता है, तो उन्हें अचानक छोड़ने से दौरे और बेसुधी की हालत हो सकती है, जो बिना इलाज के जानलेवा हो सकती है।
- डिटॉक्स के बाद ओवरडोज़। MedlinePlus बताता है कि ओपिओइड ओवरडोज़ से होने वाली ज़्यादातर मौतें उन लोगों में होती हैं जिन्होंने अभी-अभी डिटॉक्स किया हो, क्योंकि शरीर की सहनशीलता घट जाती है और पुरानी खुराक अब बहुत ज़्यादा पड़ती है।
यह आखिरी बात ज़्यादातर परिवारों को हैरान करती है। घर पर डिटॉक्स, रिहैब में छोटे ठहराव, या जेल से छूटने के ठीक बाद के दिन सबसे खतरनाक दिनों में से होते हैं।
उसे घर के कमरे में बंद करना क्यों खतरनाक है
कई परिवार चिट्टे का विदड्रॉल घर पर संभालने की कोशिश करते हैं: दरवाज़ा बंद, फोन छीन लिया, और इंतज़ार। हम समझते हैं क्यों। लेकिन बिना दवा के दर्द बहुत तेज़ होता है, वह भाग सकता है या हिंसक हो सकता है, और अगर तीन दिन बिना चिट्टे के बाद वह किसी सप्लायर तक पहुंच गया, तो उसकी पुरानी खुराक उसकी सांस रोक सकती है। घर पर डिटॉक्स सिर्फ डॉक्टर की सीधी निगरानी में ही होना चाहिए।
मेडिकल डिटॉक्स कैसा होता है
सही डिटॉक्स में डॉक्टर उसकी जांच करते हैं, दूसरे नशों और इन्फेक्शन का पता लगाते हैं, और दर्द, दस्त, घबराहट और नींद न आने के लिए दवाएं देते हैं। पानी, खाना और नींद वापस पटरी पर लाए जाते हैं, और मनोचिकित्सक देखते हैं कि कहीं डिप्रेशन या एंग्ज़ायटी तो नहीं, जिसका इलाज भी ज़रूरी हो।
कुछ लोगों के लिए ओपिओइड सब्स्टिट्यूशन ट्रीटमेंट (OST) बेहतर रहता है, जिसमें डॉक्टर कड़ी निगरानी में बुप्रेनोर्फीन जैसी नियंत्रित दवा देते हैं। हिमाचल सरकार ने मेडिकल कॉलेजों और ज़िला अस्पतालों में OST केंद्र खोलने की घोषणा की है। उसके लिए कौन सा रास्ता सही है, यह मनोचिकित्सक बता सकते हैं।
चिट्टे का ओवरडोज़: संकेत, और अगले पांच मिनट में क्या करें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार ओपिओइड ओवरडोज़ को इन तीन संकेतों से एक साथ पहचाना जा सकता है:
दूसरे संकेत: होंठ और उंगलियों के सिरे नीले या स्लेटी, खर्राटे या गले से घरघराहट की आवाज़, ढीला पड़ा शरीर, और ठंडी चिपचिपी त्वचा।
- उसे जगाने की कोशिश करेंउसका नाम ज़ोर से पुकारें और अपनी मुट्ठी की हड्डियों से उसकी छाती के बीच में ज़ोर से रगड़ें।
- तुरंत मदद बुलाएंएम्बुलेंस के लिए 108 या 112 पर कॉल करें। साफ बताएं कि नशा लेने के बाद वह ठीक से सांस नहीं ले रहा।
- सांस चल रही है, तो करवट दिलाएंकरवट वाली स्थिति (रिकवरी पोज़िशन) में उल्टी होने पर वह घुटेगा नहीं।
- सांस नहीं चल रही, तो CPR देंअगर आपको आता है, तो CPR शुरू करें। नहीं आता, तो कॉल पर मौजूद व्यक्ति आपको बताएगा।
- उसके पास रहेंमदद आने तक साथ रहें, और जो भी पुड़िया, गोलियां या सिरिंज मिलें, डॉक्टरों को दें।
उसे ठंडे पानी में न डालें, ज़ोर से थप्पड़ न मारें, उसे चलाने की कोशिश न करें, मुंह में नमक का पानी या दूध न डालें, और "सोकर ठीक हो जाएगा" सोचकर उसे अकेला न छोड़ें। इनमें कीमती मिनट बर्बाद होते हैं।
अस्पताल में डॉक्टर नालोक्सोन नाम की दवा दे सकते हैं, जो ओपिओइड ओवरडोज़ को जल्दी पलट देती है, और WHO ने इसकी पहुंच बढ़ाने की बात कही है। सबसे ज़रूरी चीज़ समय है, इसलिए यह देखने का इंतज़ार कभी न करें कि वह खुद ठीक होता है या नहीं। याद रखें, चिट्टे के ओवरडोज़ का खतरा सबसे ज़्यादा कुछ समय चिट्टा छोड़ने के बाद होता है, जैसे डिटॉक्स या रिहैब के बाद।
चिट्टे का इलाज: चिट्टे की लत का असल इलाज कैसे होता है
चिट्टे की लत एक बीमारी है, चरित्र की कमज़ोरी नहीं, और इसका इलाज संभव है। अच्छा इलाज एक साथ चार चीज़ों पर काम करता है: शरीर, मन, रोज़ की आदतें और परिवार। अच्छे नशा मुक्ति केंद्र में हर हिस्सा कैसा दिखता है, यह रहा।
पहले दिन पूरी जांच
डॉक्टर और काउंसलर पूरी जानकारी लेते हैं: वह क्या लेता है, कितना, कब से, पहले कोई इलाज हुआ या नहीं, शारीरिक और मानसिक सेहत, कानूनी परेशानियां और घर का माहौल। इसी से पूरे इलाज की योजना बनती है।
मेडिकल डिटॉक्स
पहला हफ्ता चिट्टे को शरीर से सुरक्षित तरीके से निकालने का होता है, दवाओं, पानी, खाने और कड़ी निगरानी के साथ, जैसा ऊपर विदड्रॉल वाले हिस्से में बताया गया है।
मनोचिकित्सक की देखभाल
चिट्टा लेने वाले कई युवा डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी, किसी पुराने सदमे या ध्यान की समस्या से भी जूझ रहे होते हैं। जब दोनों का इलाज साथ होता है, तो रिकवरी के टिकने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। डॉक्टर इसे ड्यूल डायग्नोसिस इलाज कहते हैं।
काउंसलिंग और थेरेपी
व्यक्तिगत काउंसलिंग से उसे समझ आता है कि उसने नशा क्यों शुरू किया और अब अलग तरीके से कैसे संभले। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसे तरीके उसे वे विचार और हालात पहचानना सिखाते हैं जिनसे तलब उठती है। ग्रुप थेरेपी और 12-स्टेप प्रोग्राम में वह उन लोगों को सुनता है जो उसी संघर्ष से गुज़र रहे हैं, और इससे वह शर्म टूटती है जो लोगों को नशे में बांधे रखती है।
फैमिली काउंसलिंग
चिट्टा सिर्फ लेने वाले को नहीं, पूरे परिवार को बदल देता है। फैमिली सेशन माता-पिता और पत्नी को भरोसा दोबारा बनाने, सही सीमाएं तय करने, और हर वक्त पहरेदार बने बिना रिकवरी में साथ देने में मदद करते हैं।
दिनचर्या, योग और फिटनेस
उठने, खाने, व्यायाम और सोने की तय दिनचर्या उस शरीर को ठीक करती है जिसे चिट्टे ने खोखला कर दिया है। योग, सांस के अभ्यास और ध्यान से घबराहट और तलब में मदद मिलती है। हमारा लेख तनाव और घबराहट के लिए योग बताता है कि रिकवरी की शुरुआत में यह इतना ज़रूरी क्यों है।
हुनर और लौटने के लिए एक भविष्य
व्यावसायिक ट्रेनिंग और काम या पढ़ाई की योजना उसे आगे देखने के लिए कुछ देती है, जो दोबारा नशे से बचाने वाली सबसे मज़बूत चीज़ों में से एक है।
आफ्टरकेयर
छुट्टी के बाद भी फॉलो-अप काउंसलिंग, परिवार के साथ मुलाकातें और दोबारा नशे से बचाव की लिखित योजना चलती रहती है। रिकवरी केंद्र के गेट पर खत्म नहीं होती।
चिट्टे की लत के इलाज में कितना समय लगता है? 15 दिन क्यों काफी नहीं
कई केंद्र 15 या 30 दिन के पैकेज का विज्ञापन करते हैं। अकेले डिटॉक्स में करीब एक हफ्ता लगता है, और वह सिर्फ शरीर से चिट्टा निकालता है। सालों में बने दिमागी बदलाव, आदतें, दोस्तियां और ट्रिगर दो हफ्तों में नहीं बदलते। लंबा और व्यवस्थित इलाज नई आदतों को जमने का समय देता है।
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट में रहकर इलाज का प्रोग्राम 180 दिन का है, जो आठ चरणों में चलता है:
- भर्ती और जांचपूरी मेडिकल, मानसिक और पारिवारिक जानकारी, और एक निजी इलाज योजना।
- डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्सदवा, पानी और आराम के साथ सुरक्षित, निगरानी वाला विदड्रॉल।
- मनोचिकित्सा और साइकोलॉजिकल थेरेपीडिप्रेशन, घबराहट या सदमे का इलाज, और आमने-सामने की काउंसलिंग।
- 12-स्टेप प्रोग्राम और ग्रुप थेरेपीरोज़ के ग्रुप, जहां लोग एक-दूसरे की ईमानदारी से सीखते हैं।
- योग, ध्यान और फिटनेसरोज़ की दिनचर्या जो शरीर को मज़बूत और मन को शांत करती है।
- फैमिली काउंसलिंगऐसे सेशन जो उसके साथ परिवार को भी संभलने में मदद करते हैं।
- दोबारा नशे से बचावट्रिगर पहचानना, मना करने का अभ्यास, और घर के लिए योजना।
- आफ्टरकेयर और फॉलो-अपपरिवार के पास लौटने के बाद भी जारी रहने वाला सहारा।
हम इलाज की गारंटी या सफलता दर का दावा नहीं करते, और कोई ईमानदार केंद्र कर भी नहीं सकता। लंबा प्रोग्राम जो देता है, वह है समय: शरीर को ठीक होने का, मन को साफ होने का, और परिवार को उसके साथ संभलने का।
दोबारा नशे से बचाव: घर लौटने के बाद रिकवरी को कैसे बचाएं
कुछ समय चिट्टा या कोई और नशा छोड़ने के बाद फिर से शुरू कर देने को रीलैप्स कहते हैं। नशे की लत में यह आम है, वैसे ही जैसे डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर जैसी लंबी बीमारियों में, और इसका मतलब यह नहीं कि इलाज बेकार गया। ज़रूरी है इसे जल्दी पकड़ना और तुरंत कदम उठाना।
हिमाचल के घरों में आम ट्रिगर
- पुराने दोस्त, और फोन में अब भी सेव सप्लायर का नंबर
- वे जगहें जहां वह चिट्टा खरीदता या लेता था
- हाथ में नकद, खासकर तनख्वाह वाले दिन
- खालीपन, और दिन भरने के लिए कोई काम या पढ़ाई न होना
- तनाव, घर के झगड़े और अकेलापन
- शादियां, त्योहार और पार्टियां जहां खुलकर शराब चलती है
- कुछ अच्छे महीनों के बाद खुद को "ठीक" मान लेना और दिनचर्या ढीली छोड़ देना
पूरे परिवार को एक आसान शब्द सिखाएं: HALT। यानी Hungry (भूखा), Angry (गुस्से में), Lonely (अकेला) और Tired (थका हुआ)। इन चार हालतों में तलब बहुत बढ़ जाती है, और घर पर इन्हें पहचानना आसान है।
दोबारा नशे के शुरुआती संकेत
- काउंसलिंग सेशन या सपोर्ट मीटिंग छोड़ना
- पुराने दोस्तों का वापस आना
- फिर से झूठ, छोटी बातों पर भी
- पैसे गायब होना, या नकद की नई मांग
- देर रात तक बाहर रहना, अचानक गुस्सा या उदासी
- छोटी पुतलियां, ऊंघना, या विदड्रॉल के लक्षण लौटना
घर पर पहले 90 दिनों की पारिवारिक योजना
- नया फोन नंबर, और सप्लायर व पुराने नशे वाले दोस्तों के नंबर डिलीट
- रोज़ की दिनचर्या: उठने का समय, काम या ट्रेनिंग, व्यायाम, खाना और नींद
- सीमित नकद, और खर्च का खुला हिसाब
- घर में शराब बिल्कुल न रखें
- काउंसलर के साथ हर हफ्ते फॉलो-अप, और फैमिली सेशन
- जहां उपलब्ध हों, नारकोटिक्स एनॉनिमस जैसी सपोर्ट मीटिंग
- तेज़ तलब आने पर क्या करना है, इसकी लिखी हुई योजना
- सिर्फ नतीजों की नहीं, कोशिश की भी तारीफ
अगर वह फिर से चिट्टा ले ले, तो क्या करें
शांत रहें। यह न कहें कि "सारा पैसा बर्बाद हो गया"। उसी दिन उसके काउंसलर या केंद्र को फोन करें, और उसे याद दिलाएं कि एक चूक महीनों की मेहनत को नहीं मिटाती। ओवरडोज़ के संकेतों पर कड़ी नज़र रखें, क्योंकि अब उसकी सहनशीलता पहले से कम है। कभी-कभी थोड़े समय के लिए फिर से इलाज की ज़रूरत होती है, और इसमें कोई बुराई नहीं।
सबसे अच्छा नशा मुक्ति केंद्र या रिहैब सेंटर कैसे चुनें
गूगल पर "नशा मुक्ति केंद्र कांगड़ा" या "सबसे अच्छा रिहैब सेंटर" खोजें, तो दर्जनों वेबसाइटें खुद को सबसे अच्छा बताती मिलेंगी। कुछ सच में अच्छे हैं। कुछ खतरनाक हैं। फर्क ऐसे पहचानें।
कानून: हर रिहैब सेंटर का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है
मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत नशे की समस्या को मानसिक बीमारी माना जाता है, और नशा मुक्ति व रिहैब केंद्र मानसिक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान हैं। ऐसा कोई भी प्रतिष्ठान राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं चल सकता। हिमाचल में यह हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (HPSMHA) है। नए केंद्र को पहले प्रोविज़नल रजिस्ट्रेशन मिलता है, जब तक वह इमारत, स्टाफ और इलाज के न्यूनतम मानक पूरे करता है, और ज़िला स्तर की टीमें उसकी जांच कर सकती हैं। प्राधिकरण ने परिवारों की सुविधा के लिए मान्यता प्राप्त केंद्रों की सूची भी जारी की है।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले केंद्रों में क्या गलत होता है
ये चेतावनियां असली हैं। HPSMHA ने एक बार परवाणू में दो केंद्र बंद करवाए, जब तीन महीनों में वहां दो लोगों की मौत हुई। बताया गया कि उनमें से एक की किसी मेडिकल अफसर ने जांच तक नहीं की थी, और परिवारों से उन सेवाओं के पैसे लिए गए जो कभी दी ही नहीं गईं। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि कुछ केंद्रों में पुनर्वास के नाम पर धमकियां और मारपीट होती थी।
ऊना में पुलिस को ऐसे केंद्र मिले जहां 25 की अनुमति पर 50 लोग रखे गए थे। और कांगड़ा में The Tribune की पड़ताल में ऐसे केंद्र मिले जो बिना सही लाइसेंस या मनोचिकित्सक के चल रहे थे, जहां मारपीट के आरोप थे, लोगों को छह महीने या उससे ज़्यादा बंद रखा गया था, और बिना किसी नियम के भारी फीस ली जा रही थी।
भर्ती से पहले इन 10 बातों की जांच करें
- HPSMHA का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, जो आपको दिखाया जाए और जिसका नंबर आप जांच सकें
- मनोचिकित्सक जो सच में मरीज़ों को देखता हो, और इमरजेंसी के लिए डॉक्टर
- डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स, बंद कमरे में "एकदम छुड़ाना" नहीं
- ट्रेंड स्टाफ: साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर, नर्स और फार्मासिस्ट
- लिखी हुई इलाज योजना और प्रोग्राम की साफ अवधि
- लिखित फीस, जिसमें साफ हो कि क्या शामिल है और क्या नहीं
- फैमिली काउंसलिंग, और मिलने व फोन की साफ नीति
- साफ कमरे, अच्छा खाना, और व्यायाम व खुली हवा की जगह
- छुट्टी के बाद आफ्टरकेयर और फॉलो-अप
- ईमानदार बातचीत, "100% इलाज" का कोई वादा या गारंटी नहीं
खतरे के संकेत: ये दिखें तो वहां से लौट आएं
- "15 दिन में 100% इलाज" जैसे दावे
- ज़बरदस्ती उठाकर ले जाने वाली "पिकअप सर्विस"
- कोई डॉक्टर या मनोचिकित्सक रिकॉर्ड पर नहीं
- रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाने से इनकार
- परिवार को कभी मिलने या फोन करने की इजाज़त नहीं
- सिर्फ नकद, कोई रसीद नहीं
- ज़ंजीरें, बंद कमरे, या मारपीट का कोई भी निशान
किसी को भर्ती करवाने से पहले केंद्र देखने, सवाल पूछने और कमरे देखने का आपको पूरा हक है। आपके परिवार के लिए सबसे अच्छा नशा मुक्ति केंद्र वही है जो इन जांचों पर खरा उतरे और आपके सवालों का स्वागत करे, न कि वह जिसका विज्ञापन सबसे बड़ा हो।
हिमाचल के परिवारों के लिए सरकारी मदद और हेल्पलाइन
आप निजी केंद्र चुनें या न चुनें, ये मुफ्त सेवाएं जानना ज़रूरी है। ज़रूरत पड़ने से पहले, आज ही इन्हें फोन में सेव कर लें।
| नंबर या सेवा | किस काम के लिए |
|---|---|
| 14446 | नशा मुक्त भारत अभियान की राष्ट्रीय टोल-फ्री नशा मुक्ति हेल्पलाइन, काउंसलिंग और सही जगह रेफर करने के लिए |
| 14416 या 1-800-891-4416 | टेली-मानस: भारत सरकार की मुफ्त, 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता, आपकी अपनी भाषा में |
| 112 | पुलिस, फायर और एम्बुलेंस के लिए इमरजेंसी नंबर। हिमाचल में माता-पिता नशे की लत के लिए मदद मांगने को भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं |
| 108 | मेडिकल इमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस, ओवरडोज़ में भी |
| 1933 | नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की MANAS हेल्पलाइन, नशा तस्करी की सूचना देने के लिए |
| ड्रग फ्री हिमाचल ऐप | हिमाचल पुलिस का ऐप, जिसमें अपना नाम बताए बिना नशा बेचने की सूचना दी जा सकती है |
कांगड़ा और आसपास के सरकारी नशा मुक्ति केंद्र
- ज़िला नशा मुक्ति केंद्र, प्रयास भवन, धर्मशाला, ज़िला रेड क्रॉस सोसाइटी कांगड़ा द्वारा: 01892-224408
- नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, नूरपुर, यह भी रेड क्रॉस द्वारा: 01893-221200
- ज़िला रेड क्रॉस कार्यालय, धर्मशाला: 01892-224888 (UNI की रिपोर्ट)
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज, टांडा: यहां के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ मेंटल हेल्थ को नशा मुक्ति और पुनर्वास के लिए राज्य का नोडल संस्थान बनाया गया है
- दिशा केंद्र: हिमाचल भर के स्वास्थ्य संस्थानों में 108 काउंसलिंग और शुरुआती मदद केंद्र
- महिलाओं के लिए: शिमला के पास मशोबरा में नवजीवन महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, जो हिमाचल का पहला सरकारी महिला केंद्र है
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट एक निजी, रजिस्टर्ड चैरिटेबल केंद्र है। हम हमेशा यही चाहेंगे कि परिवार को कहीं न कहीं मदद मिले, इसलिए अगर ये सेवाएं आपके लिए बेहतर हैं, तो ज़रूर इनका इस्तेमाल करें।
पास का नशा मुक्ति केंद्र: कांगड़ा, पालमपुर और धर्मशाला
मुसीबत के वक्त ज़्यादातर परिवार गूगल पर "मेरे पास नशा मुक्ति केंद्र" या "रिहैब सेंटर नियर मी" लिखकर खोजते हैं। पास होना मायने रखता है। माता-पिता और पत्नी को मिलने आने और फैमिली काउंसलिंग में शामिल होने में आसानी होनी चाहिए। लेकिन सही दूरी भी ज़रूरी है: रिकवरी के लिए उसे कुछ समय अपने पुराने दोस्तों, सप्लायर और पुराने रास्तों से दूर रहना चाहिए।
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट गांव टांडा खोली में, FCI गोदाम के पास, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा के नज़दीक, कांगड़ा ज़िले में है। पूरी घाटी से परिवार हमारे पास आते हैं। अपने इलाके की जानकारी के लिए ये पेज देखें (अंग्रेज़ी में):
पालमपुर के परिवारों के लिए
चाय के बागानों और घाटी में फैले गांवों वाले पालमपुर में 2026 में चिट्टे से जुड़ी कई गिरफ्तारियां हुई हैं। अगर आप पालमपुर, बैजनाथ, जयसिंहपुर, पंचरुखी या नगरोटा बगवां में रहते हैं और पास का नशा मुक्ति केंद्र या रिहैब सेंटर खोज रहे हैं, तो आप किसी भी समय सलाह के लिए हमें फोन कर सकते हैं, भले ही अभी किसी को भर्ती करवाने के लिए तैयार न हों। स्थानीय परिवारों के लिए हमारे पालमपुर रिहैब सेंटर पेज पर और जानकारी है।
पालमपुर और पूरी कांगड़ा घाटी के परिवारों की सेवा में।
चिट्टे से जुड़े भ्रम, जो परिवारों को आगे बढ़ने नहीं देते
भ्रम: "अगर वह हमसे सच में प्यार करता, तो छोड़ देता।"
चिट्टा दिमाग के खुशी वाले सिस्टम को बदल देता है। प्यार बहुत मायने रखता है, लेकिन वह विदड्रॉल को बंद नहीं कर सकता। यह काम इलाज करता है।
भ्रम: "शादी कर दो, सुधर जाएगा।"
शादी चिट्टे की लत का इलाज नहीं है। इससे अक्सर एक पत्नी, और बाद में एक बच्चा भी इस नुकसान में जुड़ जाता है। पहले इलाज, फिर भविष्य की योजना।
भ्रम: "एक बार चिट्टा लेने से कुछ नहीं होता।"
बाज़ार के चिट्टे में कुछ भी मिला हो सकता है, और पहली बार में भी ओवरडोज़ हो सकता है। हर नियमित नशा करने वाले ने "बस एक बार" से ही शुरुआत की थी।
भ्रम: "खाने में चुपके से दवा मिला दो, नशा छूट जाएगा।"
"बिना बताए नशा छुड़ाने की दवा" के नाम पर बिकने वाले पाउडर साबित नहीं हैं और नुकसानदायक हो सकते हैं। डॉक्टर के बिना और उसकी जानकारी के बिना कोई भी दवा देना उसे गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
भ्रम: "रिहैब तो जेल जैसा होता है।"
एक अच्छा, रजिस्टर्ड रिहैब देखभाल की जगह है, जहां डॉक्टर, काउंसलिंग, खाना, योग और परिवार से मुलाकात होती है। जो जगह जेल जैसी लगे, वह खतरे का संकेत है, रिहैब नहीं।
भ्रम: "अगर वह दोबारा नशा करे, तो रिहैब बेकार गया।"
रिकवरी में दोबारा नशा होना आम है। जल्दी और शांति से उठाया गया कदम इसे एक चूक बनाए रखता है, चिट्टे में पूरी वापसी नहीं बनने देता।
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट: हिमाचल के परिवारों के लिए किफायती नशा मुक्ति केंद्र
ईशान पठानिया, संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट क्यों बना
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी ईशान पठानिया खुद पांच साल से रिकवरी में हैं। वे जानते हैं कि चिट्टा एक नौजवान के साथ क्या करता है, और उसे प्यार करने वालों के साथ क्या करता है।
उन्होंने एक और बात देखी। हिमाचल के बहुत से परिवार निजी रिहैब केंद्रों की फीस दे ही नहीं पाते थे, इसलिए उनके बेटे बिना इलाज के रह जाते थे, या सस्ते, बिना रजिस्ट्रेशन वाले केंद्रों में पहुंच जाते थे जहां फायदे से ज़्यादा नुकसान होता था। उनका जवाब था एक ऐसा रजिस्टर्ड, डॉक्टर की निगरानी वाला नशा मुक्ति केंद्र, जिसका खर्च आम हिमाचली परिवार सच में उठा सकें, और जिसकी फीस पहले फोन से ही लिखित और साफ हो।
यही सोच इस ट्रस्ट के होने की वजह है, और इसीलिए हम फीस को जितना हो सके उतना कम रखते हैं। ईशान खुद केंद्र चलाने में शामिल रहते हैं, और यहां रहने वाले जानते हैं कि वे ऐसे व्यक्ति से बात कर रहे हैं जो ठीक उसी रास्ते से गुज़र चुका है।
फीस, साफ-साफ
| प्लान | कमरा और खाना | फीस |
|---|---|---|
| Shared Residential Care | शेयर्ड कमरा, सामान्य खाना | ₹12,500 प्रति माह |
| B Caring | डीलक्स कमरा, दो लोगों के लिए, बेहतर खाना | ₹25,000 प्रति माह |
| A Caring | प्राइवेट कमरा, अकेले के लिए, बेहतर खाना | ₹40,000 प्रति माह |
| डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स | भर्ती के समय, एक बार | ₹6,000 एक बार |
हर प्लान में इलाज बिल्कुल एक जैसा है। सिर्फ कमरा और खाना बदलता है। हर प्लान में रहना और खाना, डॉक्टर की लिखी दवाएं, डॉक्टर और मनोचिकित्सक की जांच, काउंसलिंग, ग्रुप थेरेपी, योग, फिटनेस, सभी गतिविधियां और फैमिली काउंसलिंग शामिल है। केंद्र के बाहर की किसी चीज़, जैसे अस्पताल रेफरल या आने-जाने, के बारे में पहले परिवार से बात की जाती है।
परिवार खुद क्या जांच सकते हैं
- हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, शिमला: प्रोविज़नल रजिस्ट्रेशन क्रमांक 193, मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम 2017 की धारा 66(4) और 66(11) के तहत, 14/05/2026 को जारी। सर्टिफिकेट केंद्र पर देखा जा सकता है।
- रजिस्टर्ड चैरिटेबल ट्रस्ट: रजि. नंबर 2025/19/IV/123, बुक नंबर IV, वॉल्यूम 4067, सब-रजिस्ट्रार-I कार्यालय, कश्मीरी गेट, दिल्ली, 14 फरवरी 2025।
- 180 दिन का, आठ चरणों वाला प्रोग्राम, जिसकी शुरुआत डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स से होती है।
- टीम में साइकोलॉजिस्ट, MSW काउंसलर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, योग व वेलनेस इंस्ट्रक्टर और वोकेशनल ट्रेनर शामिल हैं।
- कॉल और WhatsApp के लिए 24 घंटे खुला: +91 62304 15581।
हम किसे भर्ती कर सकते हैं
हमारा केंद्र रहकर इलाज वाला है और सिर्फ पुरुषों के लिए है, 18 साल और उससे ऊपर, ऊपरी उम्र की कोई सीमा नहीं। हम चिट्टा, हेरोइन, स्मैक, ब्राउन शुगर, शराब, चरस, गांजा, भांग, अफीम, डोडा, भुक्की, ट्रामाडोल, कोडीन सिरप, अल्प्राज़ोलम, कोकीन, MDMA, इंजेक्शन से नशा और मिले-जुले नशे का इलाज करते हैं। महिलाओं के लिए ऊपर बताए गए सरकारी नवजीवन केंद्र को देखें, या टेली-मानस पर 14416 पर कॉल करें।
चिट्टे की लत और नशा मुक्ति केंद्र से जुड़े सवाल
घर में कोई चिट्टा ले रहा है तो सबसे पहले क्या करें?
शांत रहें और जब वह नशे में या गुस्से में हो, तब उससे न उलझें। जो देखा है उसे चुपचाप लिख लें, ध्यान रखें कि परिवार में कोई उसे पैसे न दे, और डॉक्टर, काउंसलर या मुफ्त हेल्पलाइन 14446 और 14416 से बात करें। फिर जब वह होश में हो, तब बात करें और किसी रजिस्टर्ड नशा मुक्ति केंद्र में इलाज की योजना बनाएं।
चिट्टा क्या है, क्या यह हेरोइन, स्मैक या ब्राउन शुगर जैसा ही है?
चिट्टा उत्तर भारत में हेरोइन का आम नाम है, जो मॉर्फिन से बना एक ओपिओइड है। बाज़ार में चिट्टे के नाम पर जो बिकता है, वह आमतौर पर अशुद्ध होता है और उसमें दूसरे केमिकल मिले होते हैं। स्मैक और ब्राउन शुगर भी अशुद्ध हेरोइन के ही नाम हैं। इन सबमें लत और ओवरडोज़ का खतरा एक जैसा है।
कैसे पता करें कि बेटा चिट्टा ले रहा है? चिट्टे की पहचान क्या है?
कई हफ्तों का पैटर्न देखें: बहुत छोटी पुतलियां, ऊंघना, बार-बार खुजलाना, वज़न घटना, झूठ बोलना, छिपकर मिलने वाले नए दोस्त, पैसे या गहने गायब होना, और कमरे में जली सिल्वर फॉयल, मुड़े नोट या लाइटर। नशा न मिलने पर नाक बहना, उबासी, पसीना और बदन दर्द शुरुआती विदड्रॉल हो सकता है।
चिट्टे का इलाज क्या है? क्या चिट्टे की लत छूट सकती है?
हां, चिट्टे की लत का इलाज हो सकता है। इलाज में आमतौर पर डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स, मनोचिकित्सक की देखभाल, काउंसलिंग और थेरेपी, 12-स्टेप जैसे ग्रुप प्रोग्राम, फैमिली काउंसलिंग, अच्छी दिनचर्या और दोबारा नशे से बचाव के लिए आफ्टरकेयर शामिल होते हैं। लंबे और व्यवस्थित प्रोग्राम से स्थायी बदलाव की सबसे अच्छी संभावना रहती है।
क्या घर पर चिट्टा छुड़ाया जा सकता है?
कुछ लोग घर पर चिट्टा छोड़ पाते हैं, लेकिन बिना मेडिकल मदद के यह मुश्किल और जोखिम भरा है। विदड्रॉल बहुत दर्दनाक होता है, पहले दिनों में फिर से नशा करना आम है, और कुछ दिन छोड़ने के बाद दोबारा लेने पर ओवरडोज़ हो सकता है क्योंकि सहनशीलता घट जाती है। अगर घर पर डिटॉक्स करना ही है, तो सिर्फ डॉक्टर की सीधी निगरानी में करें।
चिट्टा छोड़ने पर क्या लक्षण आते हैं और कितने दिन रहते हैं?
आखिरी बार चिट्टा लेने के 6 से 12 घंटे में बेचैनी, उबासी, नाक बहना, पसीना और तलब से लक्षण शुरू होते हैं। पहले से तीसरे दिन तक बदन दर्द, पेट में मरोड़, दस्त, उल्टी और नींद न आना सबसे ज़्यादा होता है, और करीब एक हफ्ते में ये कम होने लगते हैं। तलब, उदासी और कम नींद हफ्तों या महीनों तक रह सकती है।
चिट्टे का ओवरडोज़ हो जाए तो क्या करें?
अगर वह जाग नहीं रहा, पुतलियां बहुत छोटी हैं या सांस धीमी है, तो तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें। उसका नाम ज़ोर से पुकारें और छाती पर ज़ोर से रगड़ें। सांस चल रही हो तो करवट दिलाएं। सांस न चल रही हो और आपको आता हो तो CPR दें। उसके साथ रहें और जो भी पुड़िया या सिरिंज मिले, डॉक्टरों को दें।
क्या उसे तकलीफ से बचाने के लिए पैसे दें या चिट्टा खरीद दें?
नहीं। चिट्टा खरीदना या उसके लिए पैसे देना लत को जारी रखता है, ओवरडोज़ का कारण बन सकता है, और NDPS एक्ट के तहत चिट्टा रखना अपराध है। विदड्रॉल का दर्द डॉक्टर सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं, इसलिए मेडिकल मदद के लिए फोन करें।
बेटा रिहैब जाने से मना कर रहा है, हम क्या करें?
शांत रहें और बातचीत जारी रखें। जो बातें आपने देखी हैं उन पर बात करें, फैमिली मीटिंग के लिए काउंसलर की मदद लें, किसी ऐसे व्यक्ति को साथ लें जिसकी वह इज़्ज़त करता है, और पैसे या बहानों से लत को बचाना बंद करें। बहुत से युवा योजना बनाकर की गई इज़्ज़त भरी बातचीत के बाद मान जाते हैं, और इलाज शुरू होने पर उनका हौसला अक्सर बढ़ता है।
क्या किसी को ज़बरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र ले जाना कानूनी है?
मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत भर्ती आमतौर पर अपनी मर्ज़ी से होती है। बिना सहमति भर्ती सिर्फ कुछ खास हालात में, योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जांच के बाद और कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ हो सकती है। किसी को बांधना या घसीटकर ले जाना इलाज नहीं है और अपराध हो सकता है। अपने मामले के लिए किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें।
चिट्टे की लत के इलाज में कितना समय लगता है? क्या 15 या 30 दिन काफी हैं?
अकेले डिटॉक्स में करीब एक हफ्ता लगता है, और वह सिर्फ शरीर से नशा निकालता है। आदतें, सोच और ट्रिगर बदलने में महीनों लगते हैं, इसीलिए कई अच्छे प्रोग्राम कई महीनों के होते हैं। ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट का प्रोग्राम 180 दिन का है, जो आठ चरणों में चलता है।
रिहैब के बाद वह दोबारा नशा करे तो क्या करें?
दोबारा नशा होना आम है और इसका मतलब यह नहीं कि इलाज बेकार गया। शांत रहें, उसी दिन उसके काउंसलर या केंद्र से संपर्क करें, ओवरडोज़ पर कड़ी नज़र रखें क्योंकि उसकी सहनशीलता कम हो चुकी है, और जल्दी से सहायता फिर शुरू करें। कभी-कभी थोड़े समय के लिए फिर से इलाज की ज़रूरत होती है।
कांगड़ा में सबसे अच्छा नशा मुक्ति केंद्र कैसे ढूंढें?
ऐसा केंद्र देखें जो हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में रजिस्टर्ड हो, जहां मनोचिकित्सक, डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स, ट्रेंड काउंसलर, फैमिली काउंसलिंग, लिखित फीस और आफ्टरकेयर हो। भर्ती से पहले केंद्र देखने जाएं, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें, और 100% इलाज का वादा करने या ज़बरदस्ती करने वाली किसी भी जगह से बचें।
पालमपुर या धर्मशाला के पास अच्छा रिहैब सेंटर कौन सा है?
सबसे अच्छा वही है जो रजिस्टर्ड हो, जहां परिवार आसानी से मिलने आ सके, और जहां मेडिकल डिटॉक्स, मनोचिकित्सक की देखभाल, काउंसलिंग और लंबा प्रोग्राम हो। टांडा खोली, कांगड़ा में ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट पालमपुर, धर्मशाला और पूरी घाटी के परिवारों की सेवा करता है, और आप सलाह के लिए किसी भी समय +91 62304 15581 पर कॉल कर सकते हैं।
कैसे पता करें कि नशा मुक्ति केंद्र हिमाचल में रजिस्टर्ड है या नहीं?
केंद्र से हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें और नंबर नोट करें, फिर शिमला में प्राधिकरण से इसकी पुष्टि करें। असली केंद्र बिना झिझक सर्टिफिकेट दिखाएगा। ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट के पास प्रोविज़नल रजिस्ट्रेशन क्रमांक 193 है, जिसे केंद्र पर देखा जा सकता है।
क्या कांगड़ा में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र हैं?
हां। ज़िला रेड क्रॉस सोसाइटी प्रयास भवन, धर्मशाला में ज़िला नशा मुक्ति केंद्र (01892-224408) और नूरपुर में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (01893-221200) चलाती है। टांडा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज को नशा मुक्ति के लिए राज्य का नोडल संस्थान बनाया गया है।
ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट नशा मुक्ति केंद्र की फीस कितनी है?
मासिक फीस Shared Residential Care के लिए ₹12,500, डीलक्स ट्विन-शेयरिंग कमरे वाले B Caring के लिए ₹25,000, और प्राइवेट कमरे वाले A Caring के लिए ₹40,000 है। डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स ₹6,000 है, जो भर्ती के समय एक बार लिया जाता है। हर प्लान में इलाज एक जैसा है।
फीस में क्या-क्या शामिल है?
हर प्लान में रहना और खाना, डॉक्टर की लिखी दवाएं, डॉक्टर और मनोचिकित्सक की जांच, काउंसलिंग, ग्रुप थेरेपी, योग, फिटनेस, सभी गतिविधियां और फैमिली काउंसलिंग शामिल है। केंद्र के बाहर की किसी चीज़, जैसे अस्पताल रेफरल या आने-जाने, के बारे में पहले परिवार से बात की जाती है।
क्या आप शराब, चरस, भांग और गोलियों के नशे का भी इलाज करते हैं?
हां। चिट्टा, हेरोइन और स्मैक के साथ हम शराब, चरस, गांजा, भांग, अफीम, डोडा, भुक्की, ट्रामाडोल, कोडीन सिरप, अल्प्राज़ोलम, कोकीन, MDMA, इंजेक्शन से नशा और मिले-जुले नशे का भी इलाज करते हैं।
शराब छुड़ाने का इलाज क्या है? क्या बिना बताए दी जाने वाली दवा काम करती है?
शराब की लत का इलाज डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स और उसके बाद काउंसलिंग, थेरेपी और परिवार के सहयोग से होता है। रोज़ भारी पीने के बाद अचानक छोड़ने से दौरे पड़ सकते हैं, इसलिए डिटॉक्स डॉक्टर की देखरेख में होना चाहिए। खाने में चुपके से मिलाने के लिए बेचे जाने वाले पाउडर साबित नहीं हैं, नुकसानदायक हो सकते हैं, और इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
क्या ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट में महिलाओं को भर्ती किया जाता है?
नहीं। हमारा केंद्र 18 साल और उससे ऊपर के पुरुषों के लिए है। महिलाओं के लिए शिमला के पास मशोबरा में सरकार का नवजीवन महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र एक विकल्प है, और मुफ्त टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 आपकी मदद कर सकती है।
क्या हमारे परिवार की जानकारी गोपनीय रहेगी?
हां। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 इलाज करवा रहे हर व्यक्ति को गोपनीयता का अधिकार देता है, और रजिस्टर्ड केंद्र को मरीज़ों और परिवारों की जानकारी निजी रखनी होती है, सिवाय उन हालात के जहां कानून खुलासा ज़रूरी बनाता है।
क्या परिवार मिलने आ सकता है और काउंसलिंग में शामिल हो सकता है?
हां। फैमिली काउंसलिंग ईशान चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रोग्राम का अहम हिस्सा है, और परिवारों को जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। मिलने और फोन के मौजूदा समय के लिए हमें कॉल करें।
हिमाचल के परिवार किन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल कर सकते हैं?
राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन के लिए 14446, टेली-मानस मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए 14416, एम्बुलेंस के लिए 108, और किसी भी इमरजेंसी के लिए 112 पर कॉल करें। नशा बेचने की सूचना देने के लिए MANAS हेल्पलाइन 1933 या ड्रग फ्री हिमाचल ऐप का इस्तेमाल करें।
क्या कभी-कभार चिट्टा लेने से भी मौत हो सकती है?
हां। बाज़ार के चिट्टे में अनजान चीज़ें मिली होती हैं और उसकी ताकत बदलती रहती है, इसलिए कभी-कभार लेने से भी ओवरडोज़ हो सकता है, खासकर जब इसे शराब या गोलियों के साथ लिया जाए, या कुछ समय छोड़ने के बाद लिया जाए।
परिवार के लिए आखिरी बात
अगर आपने यहां तक पढ़ा है, तो जिसके लिए आप परेशान हैं, वह खुशकिस्मत है कि उसके पास आप हैं। चिट्टा ताकतवर है, लेकिन उस परिवार से ज़्यादा ताकतवर नहीं जो शांत रहे, सही मदद ले और साथ खड़ा रहे।
आज ही एक छोटा कदम उठाइए। हेल्पलाइन नंबर सेव कर लीजिए। जो देखा है उसे लिख लीजिए। या बस फोन करके अपने सवाल पूछ लीजिए। शुरुआत के लिए सब कुछ पता होना ज़रूरी नहीं है, और आपको यह अकेले नहीं करना है।
स्रोत और संदर्भ
इस गाइड का हर आंकड़ा और हर खबर नीचे दिए स्रोतों से है। हमने किसी गिरफ्तार व्यक्ति, पीड़ित या परिवार का नाम नहीं लिया है।
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